[2024] म्युचुअल फंड क्या है। म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें?

[2024] म्युचुअल फंड क्या हैम्युचुअल फंड कैसे काम करता हैम्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैम्युचुअल फंड के फ़ायदे और नुकसान क्या है? म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें?

यदि आप इस लेख को पढ़ रहे है तो मुझे पूरा यकीन और विश्वास है की आप इन्वेस्ट करनें या इन्वेस्टिंग के बारें में सीखनें के बहुत ज्यादा इच्छुक हैं, इसलिए आपसे निवेदन है की यदि आप इस लेख को पूरा पढ़ते और समझतें है तो आपको निराश नहीं होना पड़ेगा, आप जो भी जानकारी लेनें इस लेख में आये है वो पूरी जानकारी मैं इस लेख के माध्यम से आपको देने का प्रयास करूँगा.

तो देर न करते हुए आइये बात करते हैं की म्युचुअल फंड क्या है? म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें? और इसके साथ ही इसी लेख में हम म्युचुअल फंड के फ़ायदे और नुकसान के बारें में भी जानेंगे.

म्युचुअल फंड क्या है– What is Mutual Fund In Hindi

म्युचुअल फंड क्या है-अगर इसे बिल्कुल आसान शब्दों में समझें तो “म्युचुअल फंड किसी कंपनी में कई निवेशकों द्वारा निवेश किये गए पैसों का एक फंड होता है जिसे फंड मैनेजर द्वारा अलग-अलग जगहों जैसे-स्टॉक्स, बांड्स या किसी अन्य प्रॉपर्टी या एसेट्स में निवेश किया जाता हैं, जिससे निवेशकों को अच्छा-खासा रिटर्न मिल सके”.

शेयर मार्केट या किसी और एसेट्स में निवेश करनें का यह इनडायरेक्ट तरीका होता है, क्योंकि इसमें निवेश करनें वाले निवेशकों को शेयर मार्केट या अन्य एसेट्स की ज्यादा जानकारी नहीं होती है अगर होती भी है तो उन्हें शेयर मार्केट से पैसे बनाने का समय नहीं मिलता या फिर निवेशक रिश्क नहीं लेना चाहता, ऐसे ही कई कारण हो सकतें है, पर म्युचुअल फंड में लम्बे समय के लिए लगातार निवेश करना निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो सकता है.

म्युचुअल फंड को एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर मैनेज करता है, जिसको यह पता होता है की निवेशको द्वारा इकट्ठे किये गए फंड्स को कब, कहाँ और कैसे निवेश करना है, जिससे निवेशकों को कोई नुकसान न हो, निवेशकों के पोर्टफोलियों को फंड मैनेजर ही मैनेज करता है. इसलिए म्युचुअल फंड कंपनियां ऐसे फंड मैनेजर को हायर करती हैं जिसे शेयर मार्केट, बांड्स या फिर किसी और एसेट्स के बारें में पूरी जानकारी होती है और वह निवेश में बहुत ज्यादा माहिर होता है.

प्रोफेशनल फंड मैनेजर का मुख्य उद्देश्य यही होता है की निवेशकों का पैसा अच्छे स्टॉक्स, अच्छे बांड्स या फिर अच्छे से अच्छे एसेट्स में इन्वेस्ट हो ताकि निवेशकों को अच्छा-खासा रिटर्न मिलें, क्योकि निवेशकों के प्रॉफिट या लॉस से ही फंड मैनेजर भी प्रॉफिट या लॉस होता है. आज के समय में म्युचुअल फंड में निवेश की शुरुआत करनें के लिए हजारों रूपए की जरुरत नहीं होती, यदि निवेशक के ₹500 से म्युचुअल फंड में निवेश करना चाहता है तो हर महीनें वह म्युचुअल फंड में SIP करते हुए निवेश कर सकता है.

SIP क्या होता है- What is SIP in Hindi

SIP क्या है? अगर इसे सिंपलवें में बात करें तो SIP का मतलब होता है- Systematic Investment Plan यानि की जब भी निवेशक हर महीनें एक निश्चित राशि के साथ अपनें मन पसंद म्युचुअल फण्ड स्कीम में लगातार इन्वेस्ट करतें है तो उसे SIP कहतें हैं.

म्युचुअल फंड कैसे काम करता है- How Works Mutual Fund in Hindi

[2022] म्युचुअल फंड क्या है। म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें?

अब तक हमनें जाना म्युचुअल फंड क्या है? SIP क्या होता है आइये अब जानतें है की म्युचुअल फंड कैसे काम करता है?

दरअसल म्युचुअल फंड भी शेयर मार्केट का ही एक अंश है, जब निवेशक सीधे तौर पर शेयर मार्केट में निवेश नहीं कर सकते तो वह म्युचुअल फंड में इनडायरेक्टली निवेश करते है, चूंकि शेयर मार्केट में निवेश करनें के लिए गहन नॉलेज और रिसर्च की जरुरत होती और इसके लिए समय चाहिए होता है और पैसों का रिस्क लेना होता है.

ऐसे में कई निवेशक के पास उतना समय नहीं होता है की वह स्टॉक्स के बारें में पूरी रिसर्च करें या जानकारी लें और कई निवेशक के पास तो शेयर मार्केट को सीखनें की जिज्ञासा ही नहीं होती. ऐसे में वह निवेशक अपनें बचे हुए पैसों को निवेश करनें के लिए म्युचुअल फंड का सहारा लेतें हैं क्योंकि म्युचुअल फंड में निवेशक के निवेश किये हुए पैसों के पोर्टफोलियों को फंड मैनेजर (जो की इन्वेस्टिंग एक्सपर्ट होता है) मैनेज करता है.

म्युचुअल फंड कंपनियां ऐसे फंड मैनेजर को यह ज़िम्मेदारी देती है, जो निवेशक के पैसों को पूरी रिसर्च के साथ अच्छे स्टॉक्स में निवेश करें ताकि निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलें. प्रोफेसनल फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों के पोर्टफोलियों को मैनेज करतें है और वह निवेशकों के पैसों को सही जगह पर लगाकर उसे बढ़ाने का प्रयास करतें हैं.

म्युचुअल फंड में निवेशकों के पैसों को अलग-अलग जगहों पर निवेश किया जाता है, किसी भी म्युचुअल फंड में हर निवेशक अपनें इन्वेस्टमेंट के हिसाब से सामान रूप से प्रॉफिट और लॉस में भागीदार होतें हैं.

ऐसे में म्युचुअल फंड निवेशकों के पैसों को बड़ी मात्रा में अलग-अलग सेक्टर्स और फील्ड में निवेश करती हैं जिससे पैसे अलग-अलग सेक्टर्स में बंट जानें की वजह से रिस्क कम हो जाता है, क्योंकि जब फंड मैनेजर निवेशक के पैसों को अलग-अलग स्टॉक्स या सेक्टर्स में लागतें है तो एक में नुकसान होता है तो अगलें में फ़ायदा होता है तो वह रिकवर हो जाता है.

म्युचुअल फंड में निवेश की मात्रा को यूनिट के हिसाब से निर्धारित किया जाता है, इस यूनिट का बेसिक Net Asset Value (NAV) होता है, जिसके आधार पर म्युचुअल फंड ख़रीदा और बेचा जाता है, निवेशक आज जितना भी निवेश करेंगे NAV के आधार पर उतना यूनिट निवेशक के अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है.

इस तरह से लम्बे समय तक निवेश करते रहनें से निवेशकों को कुछ सालों के बाद 15-20% तक रिटर्न मिल जाता है, इसके अलावा यदि हम आज ₹500 निवेश करके सोचें की कुछ दिनों के बाद यह ₹1000 हो जायेगा तो यह म्युचुअल फंड में बिलकुल भी नहीं होता.

इसलिए म्युचुअल फंड में निवेशक 10 साल से ज्यादा समय को लेकर निवेश करते है ताकि उन्हें अच्छा रिटर्न मिल सकें, क्योंकि यह समय जितना ज्यादा होगा पैसा उतना ही ज्यादा मल्टीप्लाई होगा और बाद में निवेशक के फ़ायदे से कुछ प्रतिशत काट कर निवेशक को वापस कर दिया जाता है.

तो दोस्तों अब तक हमनें [2024] म्युचुअल फंड क्या है। म्युचुअल फंड कैसे काम करता है को जाना, म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें? जानने से पहले म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते है? जान लेते है.

नेट एसेट्स वैल्यू (NAV) क्या है- What are Net Assets Value in Hindi

नेट एसेट्स वैल्यू क्या है? तो जैसे स्टॉक मार्केट में किसी कंपनी का स्टॉक प्राइस होता है वैसे ही म्युचुअल फंड में एक NAV (Net Asset Value) होता है, अब निवेशक इस NAV बेस पर उस म्युचुअल फंड्स के यूनिट्स ख़रीदते हैं.

आइये एक उदाहरण से समझते हैं, जैसे किसी म्युचुअल फंड का NAV ₹20 रूपए है और निवेशक ₹100 निवेश करना चाहतें है तो उस म्युचुअल फंड में ₹20 के हिसाब से 5 यूनिट ख़रीद सकतें है, अब जैसे-जैसे यह म्युचुअल फंड परफॉर्म करेगा, वैसे-वैसे यह NAV बढ़ता रहेगा, लेकिन जैसे NAV ऊपर जा सकता है वैसे यह नीचे भी आ सकता है.

म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते है- What are the types of mutual funds in Hindi)

म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं? वैसे तो म्युचुअल फंड कई प्रकार के होतें हैं लेकिन आज हम मुख्यतः तीन प्रकार के म्युचुअल फंड्स के बारें में बात करेंगे जो ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

1.इक्विटी म्युचुअल फंड (Equity Mutual Funds)

इक्विटी म्युचुअल फंड वे फंड होते है जो निवेशकों का पैसा इक्विटी यानि स्टॉक्स में निवेश करते है, जो अलग-अलग कैटेगरी में होतें हैं जैसे- Large Cap, Mid Cap, Small Cap.

    I.     Large Cap-

Large cap की कैटेगरी में वे टॉप बड़ी कंपनियां आती है जिसका मार्केट कैप बहुत ज्यादा है और वह टॉप 100 मार्केट कैप कंपनियों की लिस्ट में आते हैं.

   II.     Mid Cap-

Mid Cap में वे कंपनियां आती है जिसका मार्केट कैप मिडियम होता है जो मुख्यतः 100-200 मार्केट कैप कंपनियों की लिस्ट में आती हैं.

  III.     Small Cap-

Small Cap में वे कंपनियां आती हैं जिसका मार्केट कैप छोटा होता है, जो प्रायः 250 से ऊपर के मार्केट कैप की लिस्ट में होती हैं.

2. Debt म्युचुअल फंड (Debt Mutual Fund)

Debt म्युचुअल फंड में निवेशक के पैसे को FDs यानि फिक्स्ड डिपाजिट में लगाया जाता है, इसमें रिस्क थोडा कम रहता है लेकिन रिटर्न भी कम मिलता है.

3. हाइब्रिड म्युचुअल फंड (Hybrid Mutual Fund)

हाइब्रिड म्युचुअल फंड में थोड़ा बहुत पैसा इक्विटी में और थोड़ा बहुत Debt में निवेश किया जाता है, यदि निवेशक बहुत ही कम रिस्क लेना चाहते है तो वह हाइब्रिड म्युचुअल को चूज कर सकते है, पर ध्यान रहे जिसमें रिस्क कम होता है उसमें रिटर्न भी कम ही होते हैं

म्युचुअल फंड के फ़ायदे और नुकसान क्या है?

अब तक हमनें जाना नकी म्युचुअल फंड क्या है। म्युचुअल फंड कैसे काम करता है? और म्युचुअल फंड कितनें प्रकार होते है अब आइये इसके फ़ायदे और नुकसान के बारें में जान लेते हैं.

म्युचुअल फंड के फ़ायदे (Advantage of Mutual Fund in Hindi)

म्युचुअल फंड के फ़ायदे कुछ इस प्रकार हैं.

1.अनुभवी फंड मैनेजर का लाभ-

जैसा की हम सभी को पता है की स्टॉक मार्केट में निवेश करनें के लिए, स्टॉक्स के बारें की पूरी जानकारी और उतार चढाव को समझना पड़ता है और अपनें पैसों को सावधानी से मैनेज करना होता है.

ऐसे में म्युचुअल फंड में जो प्रोफेशनल फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों को मैनेज करता है, वह बहुत ही अनुभवी होता है उसे कब, कहाँ और कैसे पैसों को निवेश करना है पता होता है, और वह हर संभव निवेशकों के पैसों को बढानें में लगा रहता है.अतः म्युचुअल फंड में निवेश करनें से इसका लाभ निवेशकों को मिलता है और निवेशकों का सारे पैसों की जिम्मेदारी म्युचुअल फंड के मैनेजर की होती है.

2. कम पूँजी का निवेश-

अक्सर किसी भी क्षेत्र में निवेश करनें के लिए एक बड़े अमाउंट की जरुरत होती है, ऐसे में एक आम इंसान के लिए यह सबसे बड़ा सिर दर्द रहता है, लेकिन म्युचुअल फंड इसको बहुत ही ज्यादा आसान बना देता है, इसलिए इसमें निवेशक केवल ₹500 से भीं SIP के माध्यम से निवेश की शुरुआत कर सकते है.

ऐसे में निवेशक को यह नहीं सोचना पड़ता है की हमारें पास ज्यादा अमाउंट हो जायेगा उसके बाद निवेश की शुरुआत करेंगे.

3. कैश करनें में आसानी-

किसी भी निवेश से बाहर निकलने में लगनें वाला समय बहुत ही ज्यादा इम्पोर्टेंस रखता है ऐसे में म्युचुअल फंड में निवेश करनें से कैश करनें में बहुत ही ज्यादा आसानी होती है.

4. Diversity का लाभ-

म्युचुअल फंड में निवेश का सबसे अच्छा फ़ायदा ये होता है की यह अलग-अलग सेक्टर्स में निवेशक के पैसों का निवेश करता है जिसे Diversity कहते हैं जिससे किसी सेक्टर्स या इंडस्ट्री विशेष का फर्क नहीं पड़ता है, जिससे निवेशक को नुकसान से बचाया जा सके.

5. समय की बचत-

म्युचुअल फंड में निवेश करनें से समय की बचत होती है, इसमें निवेश के अलावा कोई भी एक्स्ट्रा समय नहीं देना होता है, यह एक पैसिव निवेश है इसमें एक्टिव होकर काम करनें की जरुरत नहीं होती है और न ही मार्केट के उतार चढ़ाव में उलझना पड़ता है.

6. टैक्स का लाभ-

म्युचुअल फंड में निवेश करनें से निवेशक को और सभी के मुकाबले कम टैक्स देना होता, यदि म्युचुअल फंड को निवेशक एक साल से ज्यादा समय तक निवेश करते है तो मुनाफ़े का केवल 10% ही टैक्स देना होता है, और अगर यही निवेश अगर एक साल से कम समय के लिए निवेशक करते है तो 15% का टैक्स देना होता है.

वो भी जब मुनाफ़ा एक लाख रूपए से ज्यादा का होता है तब, नहीं तो एक लाख तक कोई भी टैक्स नहीं देना होता. इसके अलावा और कोई भी टैक्स म्युचुअल फंड में नहीं लगता.

7. कॉम्पौन्डिंग लाभ-

अगर निवेशक 20-30 सालों या उससे अधिक समय यानी लॉन्ग टर्म के लिए अपनें पैसों को म्युचुअल फंड में लगातार निवेश करते हैं तो निवेश कॉम्पौंडिंग का भी फ़ायदा मिलता है.

म्युचुअल फंड के नुकसान (Disadvantage of Mutual Fund)

म्युचुअल फंड के कुछ नुकसान इस तरह से हैं.

1.रिटर्न की कोई गारंटी नहीं-

म्युचुअल फंड में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती की भविष्य में कितना प्रतिशत का रिटर्न देगी, क्योंकि म्युचुअल फंड शेयर मार्केट पर डिपेंड होती है जिसमें कई उतार चढाव होतें रहते हैं इसलिए फ्यूचर में रिटर्न कम भी मिल सकता है.

2. स्कीम का चुनाव-

अक्सर म्युचुअल फंड में निवेश करनें के लिए अच्छी म्युचुअल फंड स्कीम का चुनाव बहुत ही महत्पूर्ण होता है, ऐसे में यदि निवेशक कोई भी गलती करते है तो नुकसान उनको ही होता है. ज्यादातर निवेशक किसी भी स्कीम के पिछले परफोर्मेंस को देख कर निवेश करते हैं, ऐसे में बाद में उन्हें पछताना पड़ता है.

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वेस्ट म्युचुअल फंड कैसे चुनें- How to Select Mutual Funds Hindi 2022

वेस्ट म्युचुअल फंड कैसे चुनें? क्या आप जानते है की 2000 से भी ज्यादा म्युचुअल फंड स्कीम्स है, जिसमें से हमें कुछ ही स्कीम्स चाहिए अब सवाल ये उठता है की कैसे हम वेस्ट म्युचुअल फंड स्कीम्स को चुनेंगे तो चलिए जानते हैं की वेस्ट म्युचुअल फंड कैसे चुनें- How to Select Mutual Funds Hindi.

अक्सर ऐसा देखा गया है की निवेशक एक वेस्ट म्युचुअल फंड स्कीम का चयन, स्कीम्स के पिछले कुछ सालों के रिटर्न देख कर करते हैं, ऐसे में जो भी स्कीम सबसे ज्यादा रिटर्न दी है उसी में वे भी निवेश करना शुरू कर देते हैं, जो की गलत तरीका होता है. अतः मात्र 2 सवाल के जवाब से आप वेस्ट म्युचुअल फंड स्कीम्स का चुनाव कर सकते हैं. पहला सवाल की आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं और दूसरा आप कितना बड़ा रिस्क लेना चाहते हैं.

ऐसे में अगर आप 1-3 साल के निवेश करना चाहते हैं तो आपको केवल DEBT FUNDS में निवेश करना चाहिए, और अगर आप 3-5 सालों के लिए निवेश करना चाहते हैं तो हाइब्रिड फंड्स और 5 साल से ऊपर के समय के लिए इक्विटी म्युचुअल फंड्स अच्छा विकल्प हो सकता है.

अगर आप 7 साल या उससे ज्यादा समय तक निवेश करना चाहते हैं तो स्मालकैप फंड्स या मिड कैप फंड्स एक अच्छा विकल्प हो सकता है. अगर रिस्क की बात करें तो म्युचुअल फंड में निवेश करनें के लिए आप जितना रिस्क लेंगे उतना ही अच्छा रिटर्न मिल सकता है पर इसकी कोई गारंटी नहीं होती है की अच्छा रिटर्न मिलेगा ही.

म्युचुअल फंड में ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बातें-

म्युचुअल फंड में ध्यान देने वाली बातें को आइये स्टेप टू स्टेप समझते हैं.

1.डाउनसाइट प्रोटेक्शन-

डाउनसाइट प्रोटेक्शन में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात है की कोई म्युचुअल फंड स्कीम पहले साल तो 25% की रिटर्न दी और दुसरे साल -30% की ऐसे में यह स्कीम बिल्कुल भी ठीक नहीं है क्योंकि यहाँ पर डाउनसाइट प्रोटेक्शन नहीं है.

2. रिटर्न कंसिस्टेंसी

इन सभी के साथ यह देखना ज़रूरी है की आप जिस स्कीम में निवेश कर रहे है उसके रिटर्न कंसिस्टेंस हैं या नहीं, जैसे की एक स्कीम है जिसका पहले साल 9%, दुसरे साल 9.5% और तीसरे साल 10% का रिटर्न है और दूसरी स्कीम का पहले साल का रिटर्न 12%, दुसरे साल 8% और तीसरे साल 5.5% का रिटर्न है.

ऐसे में सबसे अच्छी स्कीम पहले साल की है क्योंकि ये दुसरे स्कीम के मुकाबले अच्छी स्कीम है जिसका रिटर्न कंसिस्टेंस है.

3. फंड मैनेजर-

किसी भी म्युचुअल फंड में निवेश करनें से पहले फंड मैनेजर के बारें में जरूर जानिये क्योंकि फंड मैनेजर एक स्कीम को वेस्ट से वेस्ट परफोर्मिंग बना सकता है, इसलिए किसी भी स्कीम में फंड मैनेजर की पूरी जानकारी लेना बहुत ही ज्यादा ज़रूरी है.

जैसा की हम ऊपर जान चुके है की म्युचुअल फंड में फंड मैनेजर का कितना बड़ा रोल होता है, हमारे निवेश किये हुए पैसे के पोर्टफोलियों को मैनेज करनें में, इसलिए फंड मैनेजर की रेटिंग, एक्सपेरियंस, एजुकेशन कितना है, और फंड मैनेजर का पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड क्या है यह जानना ज़रूरी होता है.

4. फंड स्कीम की शुरुआत-

म्युचुअल फंड में निवेश करनें के लिए यह जानना नही ज़रूरी होता है की फंड स्कीम की शुरुआत कब हुई थी और वह स्कीम कितनी पुरानी है, अगर स्कीम 3 साल या उससे ज्यादा पुरानी है तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है, इन सभी के बीच हमें कई तरह के फंड ऑफर से दूर रहना है जैसे NFO.

5. फंड स्कीम की साइज़-

म्युचुअल फंड में निवेश करनें से पहले फंड स्कीम की साइज़ को जरूर देंखे, फंड की साइज़ का म्युचुअल फंड के परफोर्मेंस से कोई भी तालुक नहीं होता है, अतः हमें यह देखना ज़रूरी होता है की म्युचुअल फंड द्वारा मैनेज की जा रही एसेट्स की टोटल मार्केट वैल्यू कितना है.

6. फ़ीस और रेसियो-

फ़ीस और रेसियो के बारे में पूरा जानना म्युचुअल फंड निवेशक के लिए बेहद ज़रूरी प्रक्रिया होती है, क्योंकि म्युचुअल फंड कंपनी निवेशकों से ही लाभ कमाती है और अपनें कर्मचारियों के साथ फंड मैनेजर को पेमेंट करती हैं.

ऐसे में यदि कंपनी निवेशक से कम फ़ीस लेती है तो निवेशक अच्छा लाभ होता है, इसके साथ म्युचुअल फंड में निवेश करते वक़्त एक्सपेंसेस रेसियो जरूर चेक करना चाहिए एक्स्पेंसेस रेसियो से ही हमें पता चलता है की भुगतान शुल्क कहीं ज्यादा तो नहीं है.

7. टर्म एंड कंडीसन-

किसी भी म्युचुअल फंड में निवेश करनें के लिए उस कंपनी और स्कीमका टर्म एंड कंडीसन पूरा पढ़ें और साथ में यह भी देख लें की कंपनी कोई हिडन चार्ज तो नहीं करेगी, इन सबको ध्यान देते हुए पूरी जाँच पड़ताल के बाद ही निवेश करें.

म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें- How to Invest in Mutual Fund in Hindi

म्युचुअल फंड में निवेश करने के वैसे तो बहुत सारे तरीके और इन्वेस्टमेंट प्लेटफ़ॉर्म मौजूद हैं लेकिन आज हम जिस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें जाननें वाले है वह बहुत ही यूजर फ्रेडली और विश्वसनीय है.

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम न केवल म्युचुअल फंड बल्कि भारतीय शेयर मार्केट, अमेरिकी शेयर मार्केट, क्रिप्टो मार्केट और FD के साथ ही बहुत सारे एसेट्स में निवेश कर सकते हैं. इसके साथ ही इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से हम अपनें इन्वेस्टमेंट्स के साथ सभी एसेट्स और नेटवर्थ को ट्रैक भी कर सकते है, और अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग एक ही एप्लीकेशन में सब कुछ कर सकते हैं.

जी हां हम बात कर रहे है IND Money की जो की एक विश्वसनीय एप्लीकेशन है जहाँ पर हम ऊपर बताये गए सभी एसेट्स में निवेश कर सकते हैं, IND Money को इंस्टाल करें.

तो दोस्तों आइये जानते है की म्युचुअल फंड खरीदनें का वेस्ट तरीका क्या है?

How to Invest in Mutual Fund in Hindi

तो आइये जानते है की म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें- How to Invest in Mutual Funds Hindi, आइये step by step जानते हैं.

Step-1

अब जब आप IND Money में अपना अकाउंट सफलता पूर्वक ओपन कर लेंगे और अपनी KYC कम्प्लीट कर लेंगे तो आपको IND Money में Home Page पर इस तरह का फेस दिखेगा.

अब जब हम थोडा स्क्रॉल करेंगे तो My Total Investments में FD, Mutual Funds, US Stocks, IN Stocks, Crypto के साथ- साथ Bonds, Real Estate, PPF और बहुत से विकल्प दिखेंगे.

Step-2

वैसे तो इस एप्लीकेशन के माध्यम से हम कहीं भी निवेश कर सकते हैं लेकिन अभी हम म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें जानना चाहते हैं इसलिए Mutual Funds पर क्लिक करेंगे, उसके बाद हमें इस तरह का फेस देखनें को मिलेगा.

अब हमें Invest वाले आप्शन पर देखनें पर Start SIP और One Time का विकल्प दिखेगा और स्क्रोल करनें के बाद म्युचुअल फंड के अलग-अलग विकल्प दिखेंगे, जैसे की Trending Funds, Index Funds, High Return, Large Cap, Mid Cap etc.

अब इनमें से आप अपनें अनुसार इस भी म्युचुअल फंड में अपना रिसर्च किये है या जिसमें भी आप निवेश करना चाहते है, उस पर क्लिक करें, जैसे की मैनें Index Funds को चुना है तो जैसे ही हम इस पर क्लिक करते है तो हमें कुछ इस तरह का फेस दिखाई देता है.

अब इसको स्क्रोल करते हुए हम कई म्युचुअल फंड कंपनियों को देखते हैं ऐसे में मान लीजिये हमें HDFC Index Fund में निवेश करना है तो हम इस पर क्लिक करेंगे और इसकी सारी डिटेल्स को जानेंगे उसके बाद हम अगर हमें केवल एक ही बार में पैसा निवेश करना है तो Lumpsum को चूज करेंगे और अगर हर महीनें एक फ़िक्स अमाउंट के साथ निवेश करना है तो SIP को चूज करेंगे.

Lumpsum में हम एक ही बार पैसे को निवेश करके छोड़ देते हैं पर SIP के जरिये हम हर हफ्ते, महीनें या Quarterly अपने अनुसार एक फ़िक्स अमाउंट निवेश कर सकते हैं. अब हमें तो महीनें में ₹5000 SIP करना है इसलिए मैंने सेलेक्ट कर लिया उसके बाद Continue पर क्लिक करके हम अपनें बैंक,UPI या फिर इन्टरनेट बैंकिंग से पेमेंट कर देंगे.

इसी तरह से हम हर महीनें SIP या Lumpsum करके म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते है, यदि आपको म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें? विडियो के माध्यम से जानना और समझना है तो आप नीचे दिए गए विडियो से सीख सकतें हैं.

तो दोस्तों आज हमनें [2024] म्युचुअल फंड क्या है। म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें? के बारें में जाना, आशा करते हैं आपको जरूर कुछ जानकारी मिली होगी, इसका फ़ीडबैक हमें कमेंट् के माध्यम से जरूर बताइए, और हमारे टेलीग्राम ग्रुप को जरूर जॉइन करें और हमने ट्विटर पर फॉलो जरूर करें.

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